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सुप्रीम कोर्ट ने एक राजमिस्त्री के मामले में मुआवजे की राशि को 29 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दिया है, जो एक्सीडेंट में अपना पैर खो चुका था। कोर्ट ने कहा कि इस हादसे की वजह से वह राजमिस्त्री के तौर पर काम करने में असमर्थ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, मुआवजे का आकलन करते समय अदालत को सिर्फ शारीरिक विकलांगता के प्रतिशत के बजाय 'फंक्शनल डिसएबिलिटी' यानी काम करने की क्षमता में कमी पर विचार करना चाहिए।
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